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बाबा खाटू श्याम के जागरण में भजन सम्राट कन्हैया मित्तल के भजनों पर झूमे श्रद्धालु

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रानिया। शहर के फिरोजाबाद रोड स्थिम पाम ग्रीन सिटी में महफिल सांवरे के नाम से बाबा खाटू श्याम का विशाल जागरण आयोजित किया गया। इस जागरण रानियां शहर व आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में भक्तजन हाजिरी लगवाने आए थे। ऐलनाबाद, डबवाली, राजस्थान से भी श्रद्धालु इस समागम में आए थे। करने वाले श्याम व कराने वाले श्याम आयोजक कमेटी की ओर से आयोजित इस जागरण में भजन सम्राट कन्हैया मित्तल ने बाबा खाटू श्याम का गुणगान किया। जागरण में आर्यन स्कूल के चेयरमैन अनूप गर्ग, समाजसेवी सीए मनीष गोयल ने मुख्यातिथि के रुप में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। पूर्व पार्षद दीपक गाबा ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया। अतिथिगण ने बाबा खाटू श्याम के जागरण की ज्योति प्रज्जवलित की। मुख्यातिथि अनूप गर्ग ने कहा कि खाटू श्याम भगवान श्री कृष्ण के कलयुगी अवतार हे। महाभारत के भीम के पुत्र घटोत्कच और घटोत्कच के पुत्र बर्बरिक थे। बर्बरिक को ही बाबा खाटू श्याम कहते हैं। बर्बरीक दुनिया का सर्वश्रेष्ठ धुनर्धर थे। समासेवी मनीष गोयल ने कहा कि खाटू श्याम हारे का सहारा है। जो भी बाबा के दर पर गया है वह कभी खाली हाथ नहीं लौटा है। उसकी मुर...

नशा व कन्या भ्रूण हत्या पर स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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रानियां। डीपी मेमोरियल स्कूल सादेवाला में नशे व कन्या भ्रूण हत्या पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में एएसपी फैसल खान ने बतौर मुख्य अतिथि व रानियां से खंड शिक्षा अधिकारी राजकुमार अरोड़ा और एनपीएस स्कूल नुहियांवाली के डायरेक्टर वकील गोदारा ने विशिष्ट अतिथि के रूप शामिल रहे। इस दौरान बच्चों द्वारा नशे व गिरते लिंगानुपात पर पोस्टर, कन्या भ्रूण हत्या, नाटक और गीत के माध्यम से लोगों को नशे व कुरीतियों से दूर रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित करके किया। एएसपी फैसल खान ने कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों व अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि नशा समाज में बढ़ते अपराध की मुख्य जड़ है। समाज से इसे खत्म करने के लिए हम सब एक परिवार की तरह संगठित होकर लड़ाई लड़नी होगी। खंड शिक्षा अधिकारी राजकुमार अरोड़ा ने कहा कि कन्या भ्रुण हत्या व गिरता लिंगानुपात एक बड़ी चिंता का विषय है। शिक्षा व आधुनिकता के दौर में भी कुछ लोग आज भी लड़कियों को बोझ समझते हैं लेकिन आज लड़कियां लडक़ों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। ...

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खुशरूबाग तस्वीरें............

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किसके लिए जीते हैं.....

मेरी बडी बिटिया जब नन्हीं-सी थी, कोई भी सामान लाते, तो छोटी बहन व भाइयों को दे देती थी। हम कहीं जाते, तो उन दोनो को एक मिनट भी न छोडती - माँ जैसी ‘केयर’ करती। आज वो बडे पद पर काम करती है। आठ-नौ लाख का सालाना पैकेज पाती है। 10-12 लाख का पैकेज दामाद पाता है। पिछले दिनो वह गर्भ से थी। मैंने पूछा था- ‘छुट्टी कब से ले रही हो’ ? ‘वही दो-ढाई महीने पहले से’ ... उसने कहा था। सारी योजना सही बनी है, का विश्वास था ही। जब दो-ढाई महीने रह गये, तो पूछने पर बताया - सोचती हूँ, इधर ज्यादा काम कर लूँ, ताकि बाद में बच्चे के साथ ज्यादा रह सकूँ...। मुझे तब और अच्छा लगा था…। लेकिन यह क्या... वो तो काम करती ही गयी। मेरे पूछने पर बता देती – ‘सब ठीक तो है। डॉक्टर भी ऑफिस जाने में कुछ हर्ज नहीं बता रहे है’। जब प्रसूति को चन्द दिन ही रह गये और वह ऑफिस जाती... मैं पूरे दिन बेहद परेशान रहता। कैसे-कैसे ख्याल मन में आते...कभी फोन या एसएमएस करके हालचाल लेते रहता, पर क्या कहता इतने पढे-लिखे-कमाते बच्चों से ! फिर, कोई विचार भी तो नहीं होता अपने पास - सिवाय आशंका, चिंता के...। अन्त में जिस शुक्रवार को आखिरी दिन काम करके ...

अब समय है पुनर्नियोजन का..........

पिछले दो वर्षों से पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी को लेकर हाहाकार मची रही परंतु भारतीय अर्थव्यवस्था ने लचीलेपन के कारण स्वयं को बचाए रखा। हमारे लिए अच्छी खबर यह रही कि पिछले जुलाई व सितंबर वाली तिमाही में हमारी अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.9 प्रतिशत रही जबकि अनुमान 6.3 प्रतिशत था। इससे स्पष्ट हो जाता है कि हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से विकास की राह पर है परंतु इसके अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों की तरफ देखें तो मंदहाली के अलावा कुछ भी दिखाई नही देता। आम जन के लिए खाने- पीने, बिजली, परिवहन से लेकर उनकी सुरक्षा व्यवस्था में सुधार तो हो रहे हैं लेकिन उनकी रफ्तार काफी धीमी है। देश में जो प्रगति की लहर देखने को मिल रही है, उसे महसूस कर एक पल तो मन खुश हो जाता है। मतदाताओं में विकास के प्रति सोच पैदा हो रही है। उसी का नतीजा हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में स्पष्ट हो जाता है। पूरे देश में परिवर्तन की लहर दौड़ रही है। हर जगह नया जोश देखने को मिल रहा है। बस आवश्यकता है तो इस जोश को बनाए रखने की। यही जोश हमारे सपनों को साकार करवा सकता है अगर उचित जगह व उचित समय इस्तेमाल किया जाए। पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे अब्...

हिन्दी पर राजनीति क्यों........

हिन्दी बोलना हमारा अधिकार है। हिन्दी भाषा में वो शक्ति और मिठास है कि प्रत्येक बोलने वाले में तो उत्साह भरती ही है साथ में सुनने वाला भी मंत्रमुग्ध होए बिना नही रह सकता। इस बात कि पुष्टि समय समय पर हुई है। चाहे वह विवेकानंद का अमेरिकी सम्मेलन में संबोधन हो या अटल बिहारी के भाषन ऐसे अनेकों उदाहरण इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं। आज हमें आजाद हुए ६० सालों से भी ज्यादा वक्त हो गया है परन्तु अभी तक हम हिन्दी को अपने मनों में नही बसा पाए हैं । अधिकतर इसका सबसे बडा दोषी अंग्रेजी को ही मानते है। क्या इस तरह किसी दूसरी भाषा को कसूरवार बनाकर हमारा लाभ हो सकता है। बिल्कुल नही अगर ऐसा होना होता तो आज हिन्दी की स्थिती अंग्रेजी से बेहतर होती। हमें कब समक्ष में आएगा कि अनेक भाषाओं का ज्ञाता होना हमारी कमजोरी नही ताकत है। भिन्न भाषायों का ज्ञान ही विभिन्न देशों के रिश्तों में मधुरता ला सकता है। क्योंकि दूसरो से मधुर व गहरे सबंध बनाने में संचार यानि आमने सामने की बातचीत का होना बहुत आवश्यक होता है। एक दूसरे के साथ दुःख सुख बांटना दिलों को जोड़ता है। लेकिन दूसरी भाषाएं सीखने की तत्परता में अपनी भाषा को ...