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Showing posts from May, 2010

खुशरूबाग तस्वीरें............

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किसके लिए जीते हैं.....

मेरी बडी बिटिया जब नन्हीं-सी थी, कोई भी सामान लाते, तो छोटी बहन व भाइयों को दे देती थी। हम कहीं जाते, तो उन दोनो को एक मिनट भी न छोडती - माँ जैसी ‘केयर’ करती। आज वो बडे पद पर काम करती है। आठ-नौ लाख का सालाना पैकेज पाती है। 10-12 लाख का पैकेज दामाद पाता है। पिछले दिनो वह गर्भ से थी। मैंने पूछा था- ‘छुट्टी कब से ले रही हो’ ? ‘वही दो-ढाई महीने पहले से’ ... उसने कहा था। सारी योजना सही बनी है, का विश्वास था ही। जब दो-ढाई महीने रह गये, तो पूछने पर बताया - सोचती हूँ, इधर ज्यादा काम कर लूँ, ताकि बाद में बच्चे के साथ ज्यादा रह सकूँ...। मुझे तब और अच्छा लगा था…। लेकिन यह क्या... वो तो काम करती ही गयी। मेरे पूछने पर बता देती – ‘सब ठीक तो है। डॉक्टर भी ऑफिस जाने में कुछ हर्ज नहीं बता रहे है’। जब प्रसूति को चन्द दिन ही रह गये और वह ऑफिस जाती... मैं पूरे दिन बेहद परेशान रहता। कैसे-कैसे ख्याल मन में आते...कभी फोन या एसएमएस करके हालचाल लेते रहता, पर क्या कहता इतने पढे-लिखे-कमाते बच्चों से ! फिर, कोई विचार भी तो नहीं होता अपने पास - सिवाय आशंका, चिंता के...। अन्त में जिस शुक्रवार को आखिरी दिन काम करके ...

अब समय है पुनर्नियोजन का..........

पिछले दो वर्षों से पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी को लेकर हाहाकार मची रही परंतु भारतीय अर्थव्यवस्था ने लचीलेपन के कारण स्वयं को बचाए रखा। हमारे लिए अच्छी खबर यह रही कि पिछले जुलाई व सितंबर वाली तिमाही में हमारी अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.9 प्रतिशत रही जबकि अनुमान 6.3 प्रतिशत था। इससे स्पष्ट हो जाता है कि हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से विकास की राह पर है परंतु इसके अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों की तरफ देखें तो मंदहाली के अलावा कुछ भी दिखाई नही देता। आम जन के लिए खाने- पीने, बिजली, परिवहन से लेकर उनकी सुरक्षा व्यवस्था में सुधार तो हो रहे हैं लेकिन उनकी रफ्तार काफी धीमी है। देश में जो प्रगति की लहर देखने को मिल रही है, उसे महसूस कर एक पल तो मन खुश हो जाता है। मतदाताओं में विकास के प्रति सोच पैदा हो रही है। उसी का नतीजा हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में स्पष्ट हो जाता है। पूरे देश में परिवर्तन की लहर दौड़ रही है। हर जगह नया जोश देखने को मिल रहा है। बस आवश्यकता है तो इस जोश को बनाए रखने की। यही जोश हमारे सपनों को साकार करवा सकता है अगर उचित जगह व उचित समय इस्तेमाल किया जाए। पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे अब्...

हिन्दी पर राजनीति क्यों........

हिन्दी बोलना हमारा अधिकार है। हिन्दी भाषा में वो शक्ति और मिठास है कि प्रत्येक बोलने वाले में तो उत्साह भरती ही है साथ में सुनने वाला भी मंत्रमुग्ध होए बिना नही रह सकता। इस बात कि पुष्टि समय समय पर हुई है। चाहे वह विवेकानंद का अमेरिकी सम्मेलन में संबोधन हो या अटल बिहारी के भाषन ऐसे अनेकों उदाहरण इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं। आज हमें आजाद हुए ६० सालों से भी ज्यादा वक्त हो गया है परन्तु अभी तक हम हिन्दी को अपने मनों में नही बसा पाए हैं । अधिकतर इसका सबसे बडा दोषी अंग्रेजी को ही मानते है। क्या इस तरह किसी दूसरी भाषा को कसूरवार बनाकर हमारा लाभ हो सकता है। बिल्कुल नही अगर ऐसा होना होता तो आज हिन्दी की स्थिती अंग्रेजी से बेहतर होती। हमें कब समक्ष में आएगा कि अनेक भाषाओं का ज्ञाता होना हमारी कमजोरी नही ताकत है। भिन्न भाषायों का ज्ञान ही विभिन्न देशों के रिश्तों में मधुरता ला सकता है। क्योंकि दूसरो से मधुर व गहरे सबंध बनाने में संचार यानि आमने सामने की बातचीत का होना बहुत आवश्यक होता है। एक दूसरे के साथ दुःख सुख बांटना दिलों को जोड़ता है। लेकिन दूसरी भाषाएं सीखने की तत्परता में अपनी भाषा को ...

नशा अर्थ और काम.........

कहने की आवश्यकता ही नहीं कि नशा मानवीय व्यक्तित्व के लिए कितना घातक है। नशे के सेवन से अनेक प्रकार से मानसिक विकार पैदा होते है। इतना ही नहीं इसके इलावा नशे के सेवन से धर्म, अर्थ और काम का भी नाश होता है। हमारे सामने सवाल यह खड़ा होता है कि मनुष्य आखिर नशा करता क्यूं है? शराब, चरस, गांजा, अफीम तथा भांग का सेवन करके कुछ देर के लिए व्यक्ति सुख और आन्नद की अनुभूति करता है। मनुष्य आखिर बार-बार सुख और आन्नद की प्राप्ति के लिए बार-बार नशे का सेवन करता है। वास्तव में यही मनुष्य की आवृति उसकी आदत बन जाती हैं। मनुष्य नशे का सेवन करके एक दिन उसके पूर्ण वश में हो जाता हैं। व्यक्ति की यह परवशता असे नशेड़ी बना देती हैं। सीधी सी बात है कि नशेड़ी व्यक्ति नशा करने का बहाना ढुंढता है। यह अपनी इस आसुरी प्रवृत्ति से अपनी कुवृत्तियों पर पर्दा डालना चाहता है। यही कारण है कि वह त्यौहारो आदि पर जम कर नशा करता है। मद्यपान एक व्यापक प्रवृत्ति हैं। नशे के लिए अमीर-गरीब का कोई महत्व नहीं। सभी अपनी-अपनी आर्थिकस्थिति के अनुसार ही नशा करते है। गरीब वर्ग जहंा मामूली नशा करता है वहीं पर अमीर वर्ग उच्च श्रेणी के मादक ...